अद्भुत अधम्म साहस की यह परिभाषा है, यह मिट्टी मानवता की आशा है, ये सृष्टि
का वर्दान है, यह अवतार नहीं यह इंसान है, शक्तिमान!!!!!
ऊपर लिखी हुई पंक्तियों का origin SHAKTIMAAN नामक TV Series से है जो 1990 कि दशक
में खूब प्रचलित था।
इन पंक्तियों में संयोगवश सत्य भी कहा गया है जो निम्नलिखित में कुछ इस प्रकार है:-
“अद्भुत अधम्म साहस की यह परिभाषा है”- साहस, इस बात का कि भारत आज
भी जीवित है। जीओ और जीने दो की परम भाषा यहॉ पर हर कोई समझता है और क्षमा करने का
साहस करना जो कि कई लोगों के बस की बात नहीं होती उसका भी यहॉ पर भरपूर नज़ारा देखने
को मिलता है।
“यह मिट्टी मानवता की आशा है”- भारत की मिट्टी में उपजाऊपन
बहुत है, यहॉ पर सूरज की रोश्नी में सब कुछ उगाया जा सकता है तथा पशुपालन से भी
बहुत लाभ होता है।
भारत के खनिज सम्पदा के बारे में हर कोई जानता है, जो विश्व में सबसे ज़्यादा और यह बहुमूल्य है। इसका हमें सदुपयोग तथा रक्षा करनी चाहिए क्योंकि यह हमारी धरोहर है। किसी और का इस पर हक नहीं है, क्योंकि यह हमारी जागीर है, इस पर हम भारतीयों का सर्वप्रथम हक बनता है।
भारत के खनिज सम्पदा के बारे में हर कोई जानता है, जो विश्व में सबसे ज़्यादा और यह बहुमूल्य है। इसका हमें सदुपयोग तथा रक्षा करनी चाहिए क्योंकि यह हमारी धरोहर है। किसी और का इस पर हक नहीं है, क्योंकि यह हमारी जागीर है, इस पर हम भारतीयों का सर्वप्रथम हक बनता है।
“ये सृष्टि का वर्दान है”- भारत के पास योग, आयुर्वेद
जैसे अद्भुत ज्ञान हैं, और भी कई विद्याएं हैं जिन्हें समय की मार के कारण खो दिया
गया है, मगर धीमे-धीमे वह सब ज्ञान को वापस से अर्जित किया जा रहा है।
भारत का जीर्णोद्धार/पुनर्उत्थान हो रहा है। भारत अब फिर से महा शक्ति बनने के लिए अपने सबसे अनमोल
धरोहर-नागरिकों के महत्तव समझ चुका है, अब संघर्ष की बारी है, इनहीं धरोहर/सम्पदा को अब बचाना है और
भारत के लिए उपयोग करना है, क्योंकि क्षत्रुओं की कमी नहीं, हमें ईंट का जवाब
पत्थरों से भी ज़्यादा भीषण हथियारों से करना है, क्योंकि हमने बहुत सहन किया है,
अब और नहीं।
Beat your enemy into submission so that they don’t bother you again and let you and people related to you live in peace
and
enemies don’t be enemies anymore.
Beat your enemy into submission so that they don’t bother you again and let you and people related to you live in peace
and
enemies don’t be enemies anymore.